कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री वी.ए. सिद्दीकी (विकार अहमद सिद्दीकी) को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
बताया गया है कि आरोपी अधिकारी अपने ही विभाग के सेवानिवृत्त चौकीदार से एरियर्स भुगतान के बदले 50 हजार रुपये की मांग कर रहा था। मामला वर्ष 2011-12 से लंबित एरियर्स भुगतान से जुड़ा है। विभाग के 9 कर्मचारियों को बकाया राशि नहीं मिलने पर उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 30 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एरियर्स भुगतान के निर्देश दिए थे।
शिकायतकर्ता कुंवरलाल रजक, जो 30 सितंबर 2025 को चौकीदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे, को लगभग 7 से 8 लाख रुपये की राशि मिलनी थी। आरोप है कि जब वे भुगतान के लिए कार्यपालन यंत्री के संपर्क में आए तो उनसे 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई और बिना रकम दिए फाइल आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया गया।
लोकायुक्त में शिकायत और ट्रैप
परेशान होकर पीड़ित ने इसकी शिकायत जबलपुर लोकायुक्त एसपी अंजूलता पटले से की। शिकायत का सत्यापन करने के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार को लोकायुक्त की 12 सदस्यीय टीम तीन गाड़ियों में सवार होकर कटनी पहुंची। जैसे ही कुंवरलाल रजक कार्यपालन यंत्री वी.ए. सिद्दीकी के निवास पर पहुंचे और 20 हजार रिश्वत की रकम उन्हें सौंपी, तभी पीछे से लोकायुक्त टीम ने दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथों दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के होश उड़ गए और वह बार-बार ये कहता रहा कि, वो कुंवरलाल को नहीं जानता और उसने कोई पैसे नहीं लिए। केमिकल टेस्ट में रिश्वत लेने की पुष्टि हुई और पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की इस तरह गिरफ्तारी से जिले में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई में लोकायुक्त डीएसपी नीतू त्रिपाठी, निरीक्षक रेखा प्रजापति, बृजनंदन नरवरिया, प्रधान आरक्षक राजेश पटेल, जुबैद खान, सोनू चौकसे, अमित दाहिया, राकेश विश्वकर्मा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। लोकायुक्त की टीम मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एरियस भुगतान में और कितने कर्मचारी या अधिकारी इस भ्रष्टाचार में शामिल थे।