जबलपुर। बरगी बांध क्रूज हादसे का एक सनसनीखेज वीडियो सामने आया है। जिसमें दिख रहा है मरीज को बचाने के लिए पहुंची एंबुलेंस में कोई मेडिकल स्टाफ ही नहीं था। जबकि एक घायल को जब पानी से निकाला गया तो उसकी सांस चल रही थी। लेकिन एंबुलेंस के भीतर ना तो कोई सीपीआर देने के लिए स्टाफ था और ना ही ऑक्सीजन लगाने के लिए। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो जांच समिति के सामने रखा गया है। बरगी डैम क्रूज हादसे को आज पूरा एक माह हो गया है। 30 अप्रैल की शाम 5:30 बजे बरगी बांध के बैक बॉर्डर में 41 लोगों को लेकर निकला क्रूज मैंकल रिजॉर्ट से लगभग 4 किलोमीटर दूर बीच बांध पानी में डूब गया था। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी और 28 लोग बच गए थे।
बरगी नगर के नीरज मिश्रा ने जस्टिस संजय द्विवेदी को पेन ड्राइव में सौंपा सबूत
क्रूज हादसा क्यों हुआ, इसको लेकर काफी सवाल खड़े हुए। क्रूज पुराना था.. मौसम खराब था… क्रूज चलाने वालों की ट्रेनिंग ठीक नहीं थी, इन सभी मुद्दों पर चर्चा चल ही रही थी कि क्रूज को डिस्मेंटल भी कर दिया गया। जब काफी विवाद हुआ तो शुरुआत में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले की जांच कमिश्नर से करवाने के आदेश दिए। फिर भी विवाद नहीं थमने पर सरकार ने इस मामले की जांच रिटायर्ड हाई कोर्ट जज संजय द्विवेदी को सौंप दी। संजय द्विवेदी ने इस मामले में पर्यटन विभाग के महाप्रबंधक, रिसोर्ट मैनेजर और क्रूज चलाने वालों के बयान भी दर्ज किए हैं। इस मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बरगी नगर के रहने वाले नीरज मिश्रा ने जस्टिस संजय द्विवेदी के सामने एक पेन ड्राइव में सबूत पेश किए है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों की जान और बचाई जा सकती थी। नीरज मिश्रा ने एक वीडियो जांच समिति को दिया है, जिसमें उन्होंने बताया कि जब क्रूज डूबा और लोगों को बचाकर घाट पर लाया गया तो उनमें से कुछ लोगों की सांसे चल रही थी। उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत थी।
आरोप, यदि एंबुलेंस के भीतर कोई मेडिकल स्टाफ होता तो घायल की बचाई जा सकती थी जान
मौके पर 108 एम्बुलेंस बुलाई गई थी, लेकिन एंबुलेंस में ड्राइवर के अलावा कोई नहीं था, जबकि एंबुलेंस के भीतर मेडिकल स्टाफ का होना जरूरी है। ड्राइवर ने स्वीकार किया कि मैं अकेला आया हूं। जिस दौरान बचाए हुए लोगों को एंबुलेंस में रखा गया उस दौरान एक घायल की सांस चल रही थी और यदि एंबुलेंस के भीतर कोई मेडिकल स्टाफ होता तो घायल की जान बचाई जा सकती थी। नीरज मिश्रा का कहना है कि यह घटना उनके सामने की है, उस समय वे मौके पर मौजूद थे। किसी ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि मौके पर पहुंची एंबुलेंस में मेडिकल स्टाफ था ही नही। नीरज मिश्रा का आरोप है क्या प्रशासन केवल लाशों को ढ़ोने के लिए एंबुलेंस लेकर पहुंचा था। नीरज मिश्रा ने अपनी शिकायत में इस बात का भी जिक्र किया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की गाइडलाइन में इस बात का जिक्र है कि किसी भी नाव में सवार होने वाले लोगों के जीवन का बीमा होना चाहिए।
सभी मृतकों का बीमा के अनुसार मुआवजा तय होना चाहिए
बरगी बांध के जिस क्रूज में लोगों की जान गई, ना तो उस नाव का बीमा था और ना ही उसमें बैठे पर्यटकों का। जबकि हर पर्यटक से 200 रुपये टिकट के रूप में चार्ज किया गया था। नीरज का कहना है कि सभी मृतकों का बीमा के अनुसार मुआवजा तय होना चाहिए। या तो यह राशि बीमा कंपनी दे या फिर सरकार का पर्यटन विभाग। यदि ऐसा नहीं होता तो उनका कहना है कि वह इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इस घटना के बाद मौके पर पुलिस-प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सब पहुंचे थे। लेकिन ये लोग कब पहुंचे? इनका रिस्पांस टाइम कितना होना था? जब प्रशासन मौके पर मौजूद था और नाव से आवाज आ रही थी तब मौके पर मौजूद अधिकारियों ने क्या किया? आपदा प्रबंधन समिति की क्या जिम्मेदारी थी? इन सब मुद्दों पर भी जांच होनी चाहिए क्योंकि सरकार अपने खजाने से इन सभी मद में पैसा खर्च करती है। इन सभी आपदा प्रबंधन करने वालों को आम आदमी की जेब से पैसा जाता है तो इनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
