52 शक्तिपीठों में से एक मैहर स्थित मां शारदा के मंदिर में कुंडा विधायक राजा भैया ने शस्त्र पूजा करवाई थी। जिसका वीडियो वायरल होने के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मंदिर में शस्त्र लेकर जाना प्रतिबंधित है। वहीं, इस संवेदनशील मामले में मंदिर प्रबंधन ने चुप्पी साध रखी है।
मैहर: पर्वत शिखर पर स्थित शक्तिपीठ मां शारदा देवी के धाम में समय-समय पर पूजा अर्चना को लेकर भक्तों के साथ भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। यहां आम और खास के लिए अलग नियम हैं जिसकी तस्वीर सामने भी कई बार आती है। बीते दिनों मंदिर के गर्भ ग्रह में वीआईपी और बाहुबलियों के सामने नियम और कानून कैसे बौने साबित हो गये। इसकी तस्वीर अब सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। दरअसल यहां उत्तर प्रदेश के कुंडा से बाहुबली विधायक और जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया आए थे। उन्होंने प्रतिबंध के बावजूद मंदिर के गर्भगृह में न केवल राइफल के साथ प्रवेश किया, बल्कि बाकायदा शस्त्र पूजा भी की। हैरानी की बात यह है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्पष्ट लिखा है कि शस्त्र लेकर जाना प्रतिबंधित है फिर भी पुलिस और सुरक्षा गार्ड मूकदर्शक बने रहे। इतना ही नहीं, पुजारी ने राइफल को रोकने के बजाए उस पर चुनरी बांधी और पूजा संपन्न कराई।
राइफल कि पुजारी ने करवाई पूजा
मिली जानकारी के अनुसार, राजा भैया 6 फरवरी को अपने समर्थकों के साथ मैहर मां शारदा के दर्शन करने पहुंचे थे। वे अपने लाव-लश्कर के साथ मंदिर परिसर पहुंचे और गर्भगृह में प्रवेश किया। गर्भगृह में पूजा के दौरान उन्होंने अपने साथ लाई हुई राइफल पुजारी नितिन महाराज को थमा दी। पुजारी ने भी नियमों को ताक पर रखकर रायफल पर चुनरी बांधी, फूलों की माला डाली और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शस्त्र पूजा करवाई।
राजा भैया ने सोशल मीडिया में की है वीडियो पोस्ट
यह मामला सोमवार 9 फरवरी को तब सामने आया, जब राजा भैया के समर्थकों ने खुद ही सोशल मीडिया पर इस दौरे का वीडियो वायरल कर दिया। हालांकि बाहुबली विधायक राजा भैया ने इसकी वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म में पोस्ट की हुई है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि राजा भैया मैहर मंदिर के गर्भगृह में बैठकर पूजा कर रहे हैं और पुजारी रायफल की पूजा कर रहे हैं। पूजा के बाद पुजारी उन्हें छोड़ने सीढ़ियों तक भी आए।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
इस घटना ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर समिति द्वारा अधिकृत पुजारी को नियम पता थे। उन्हें शस्त्र पूजा से रोकना चाहिए था या प्रबंधन को सूचना देनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया बल्कि पुजारी ने खुद चुनरी बांधी और शस्त्र पूजा सम्पन्न कराई है। मामले पर सर्वोच्च सत्ता द्वारा मंदिर प्रशासक से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
