मुंबई। भारत और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझीदारी’ के रूप में उन्नत करने का संकल्प लिया और कहा कि यह केवल रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्थिरता और प्रगति की साझीदारी होगी। दोनों देशों ने, घनिष्ठ रक्षा सहयोग, कौशल एवं नवान्वेषण विकास, उच्च प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, संयुक्त उत्पादन, मुक्त व्यापार और पारगमन वीज़ा रहित आवागमन को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास करने का इरादा जताया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय शिखर बैठक में यह संकल्प जताया। इस शिखर बैठक में परस्पर सहयोग के 20 दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किये गये और आदान-प्रदान किया गया। इनमें भारत फ्रांस नवान्वेषण नेटवर्क की स्थापना, भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एवं सेफ्रॉन के बीच हैमर मिसाइलें बनाने, एक संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह की स्थापना, अमूल्य खनिजों एवं धातुओं के उत्खनन और परिष्करण, दोहरे कराधान से बचाव, भारत-फ्रांस डिजीटल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र की स्थापना, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में दोनों देशों का स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाला एक संयुक्त आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस केन्द्र की स्थापना, वैमानिकी कौशल प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना एवं डाक एवं संचार विभाग के बीच सहयोग के करार शामिल हैं। इस मौके पर दोनों नेताओं ने वर्चुअल माध्यम से कर्नाटक के वेमागल में एच125 हेलीकॉप्टर के असेम्बलिंग संयंत्र का उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें अपने “प्यारे दोस्त” का भारत के गेटवे शहर में स्वागत करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने स्मरण किया कि पिछले वर्ष वह फ्रांस की यात्रा पर गए थे, जहां मार्सिले में भारतीय सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध अत्यंत विशेष और विश्वास पर आधारित हैं। फ्रांस भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझीदारों में से एक है और राष्ट्रपति मैक्रों के साथ मिलकर इस साझीदारी को अभूतपूर्व गहराई और नई ऊर्जा दी गई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है, जो केवल सामरिक सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और प्रगति की साझीदारी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच दशकों पुराना विश्वास आज नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। फ्रांस भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझीदारों में से एक है और राष्ट्रपति मैक्रों के नेतृत्व में इस संबंध को अभूतपूर्व गहराई और ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों की साझीदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्व शांति, स्थिरता और संतुलित बहुध्रुवीय व्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस पहल है।
उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ का अर्थ है कि भारत और फ्रांस वैश्विक चुनौतियों के समाधान में मिलकर नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा दी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के वेमागल में टाटा-एयरबस के एच125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन के वर्चुअल उद्घाटन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना दोनों देशों के गहरे विश्वास और साझा औद्योगिक दृष्टि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसा हेलीकॉप्टर भारत में बनाएंगे जो विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं तक उड़ान भर सकता है और जिसे वैश्विक बाजार में निर्यात किया जाएगा।
व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौता यूरोप के साथ भारत के आर्थिक संबंधों में नया अध्याय खोलेगा। उन्होंने कहा कि इससे भारत-फ्रांस व्यापार और निवेश प्रवाह को भी नई गति मिलेगी। दोहरे कराधान से बचाव और निवेश संरक्षण से जुड़े समझौते कंपनियों और पेशेवरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेंगे।
प्रधानमंत्री ने ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल रणनीतिक साझेदारी को जन-जन की साझेदारी में परिवर्तित करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों देश स्टार्टअप, एमएसएमई, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के बीच आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे तथा संयुक्त अनुसंधान और नवान्वेषण केंद्र स्थापित करेंगे।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर, डिजिटल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र तथा एरोनॉटिक्स में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये संस्थान भविष्य की प्रौद्योगिकियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ेंगे।
वैश्विक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया अनिश्चितता और संघर्ष के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक संस्थानों में सुधार के पक्षधर हैं ताकि समकालीन चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिन्द-प्रशांत क्षेत्रों में शांति प्रयासों का समर्थन करने की बात दोहराई तथा आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप के उन्मूलन को साझा प्राथमिकता बताया।
सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस प्राचीन एवं समृद्ध सभ्यताएं हैं तथा लोगों के बीच संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ‘युगे युगेन भारत म्यूजियम’ में सहयोग के बाद अब लोथल के नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में भी फ्रांस के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा। साथ ही फ्रांस में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र खोलने की योजना भी प्रगति पर है। दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के रिश्ते साझेदारी की मजबूत नींव हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के रूप में स्थापित यह संबंध आने वाले समय में वैश्विक स्थिरता, सतत विकास और मानव कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मैक्रों के भारत-फ्रांस संबंधों के प्रति गहरे समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि आज दोनों देश मिलकर अपने संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक स्थिरता, समृद्धि और मानवता के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि नवान्वेषण हमारे संबंधों और हमारी अर्थव्यवस्थाओं के विकास के केंद्र में है। हमारे बीच अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और छात्र विनिमय के बारे में बात हुई है। हमारा रिश्ता धीरे-धीरे तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमने फ्रांस जाने के लिए ट्रांजिट वीज़ा की आवश्यकता पर भी चर्चा की है, और हम अध्ययन करेंगे कि इसे कैसे खत्म किया जाए। उन्होंने कहा, ” फ्रांस और भारत दो ऐसे देश हैं जिनके पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है
हमने अपने रचनात्मक उद्योगों को एक नई महत्वाकांक्षा और एक नया उद्देश्य दिया है। क्योंकि हमारी सोच पूरी तरह से संरेखित है। चाहे भारत की बात हो, पूरे क्षेत्र की हो, हिन्द प्रशांत क्षेत्र की बात हो, या फिर व्यापार की बात हो, हमारी सोच बहुत समान है। हम पूर्ण खुलेपन और व्यापार में विश्वास करते हैं। इसलिए हम यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार करार का स्वागत करते हैं। हमारी सोच भी बहुपक्षवाद पर पूरी तरह से जुड़ी हुई है। हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, और मुझे विश्वास है कि हम दुनिया को एक ऐसा मॉडल पेश कर सकते हैं कि एक-दूसरे के साथ कैसे काम करना है।
मेहमान नेता ने कहा कि हम दोनों एक ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाना चाहते हैं जो एक-दूसरे का सम्मान करती है, जो लोगों का सम्मान करती है, जो बहुपक्षवाद का सम्मान करती है, और जो विभिन्न भाषाओं का सम्मान करती है। क्योंकि हमारी दुनिया विविध है। इसमें कई अलग-अलग तरह के लोग, अलग-अलग चीजें हैं। लोगों की अलग-अलग संस्कृतियां हैं, और हम चाहते हैं कि एल्गोरिदम पारदर्शी, खुले हों। हम चाहते हैं कि दुनिया में बड़े संघर्षों को हल करने के लिए बहुपक्षवाद का इस्तेमाल किया जाए, जो पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अनुसार है।
राष्ट्रपति मैक्राें ने कहा, “… हम आतंकवाद के खिलाफ भी अपनी लड़ाई जारी रखना चाहते हैं, और हम सभी आतंकवादी समूहों को खारिज करते हैं। 2026 हमारे संबंधों को और गति देगा। आप ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे हैं। फ्रांस जी-7 की अध्यक्षता कर रहा है। मैंने प्रधानमंत्री मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है।” उन्होंने कहा, “चाहे वह राफेल हो, पनडुब्बियां हों या पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के इंजन, ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां हम भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में विश्वास करते हैं, और हमने वही करने की कोशिश की है, जैसा आप चाहते थे। हम दोनों रणनीतिक स्वायत्तता में विश्वास करते हैं। आपने रक्षा क्षेत्र का उल्लेख किया और मैंने भी इसके बारे में बात की। लेकिन ऐसे कई अन्य क्षेत्र हैं जहां हमारी सोच साझा की जाती है, यहां तक कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी। इन क्षेत्रों में हमारे संबंध कई वर्षों से उत्कृष्ट रहे हैं। वे काफी मजबूत हो गए हैं, और इसीलिए, जब हम जुलाई में फ्रांस में एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं, तो हमने भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में आमंत्रित किया है।”
उन्होंने कहा, “हम वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने और दुनिया के लिए एक ऐसा रास्ता खोजने के लिए एक साझा रोडमैप पर भी काम कर रहे हैं जो आधिपत्य से अलग हो।
“एयरोनॉटिक्स भी एक प्रमुख क्षेत्र है, और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क एक अन्य क्षेत्र है जहां हम एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभर रहे हैं। हम सबसे अच्छा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुनिश्चित करना चाहते हैं और इसे प्राप्त करने के लिए, हम आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ नवान्वेषण वर्ष का उद्घाटन कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि हमारे निवेशक, चाहे वे हमारे स्टार्टअप हों, हमारी कंपनियां हों, हमारे अनुसंधान एवं विकास केंद्र हों या अन्य केंद्र हों, एक साथ काम करें।”