जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुरहानपुर जिले के जंगलों में गोंद निकालने के नाम पर पेड़ों को हो रहे नुकसान को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और वन विभाग को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि वृक्षों को क्षति पहुंचाने वाली गतिविधियों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।
जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा था। याचिका वन सुरक्षा समिति जंबू पाती के अध्यक्ष शौकत अली और किसान जितेंद्र रावटोले की ओर से दायर की गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जंगलों में सराई, धावड़ा और अन्य पेड़ों से गोंद निकालने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
केमिकल और आग से हो रहा भारी नुकसान
याचिका में बताया गया कि ‘ईथफड्रेक्स’ नामक प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर के उपयोग से पेड़ों को गंभीर क्षति पहुंच रही है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार एक वैज्ञानिक रिपोर्ट में सराई के 89% और धावड़ा के 79% पेड़ों को नुकसान की पुष्टि हुई है। इसके अलावा अधिक गोंद निकालने के लिए पेड़ों के नीचे आग जलाने की भी शिकायत सामने आई है।
राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक सुनिश्चित की जाए, जिससे जंगलों और जैव विविधता की रक्षा हो सके।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
अदालत ने संकेत दिया कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नियमों के