Health News Desk: इलाज से पहले इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बीमारी के लक्षण खोजने की आदत अब लोगों के लिए परेशानी बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अधूरी और डराने वाली ऑनलाइन जानकारी लोगों में अनावश्यक डर पैदा कर रही है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और डॉक्टरों पर भरोसा भी कम होता जा रहा है।
क्या है Cyberchondria और क्यों बढ़ रहा खतरा?
भोपाल में डॉक्टरों के मुताबिक मरीज इंटरनेट पर लक्षण खोजकर खुद ही गंभीर बीमारियों का अंदेशा लगाने लगते हैं। इससे कैंसर, हार्ट अटैक या किडनी फेल जैसी बीमारियों का डर पहले ही मन में बैठ जाता है। इस स्थिति को ‘साइबर कॉन्ड्रिया’ कहा जा रहा है, जिसमें मरीज इलाज और दवाओं के साइड इफेक्ट्स से जरूरत से ज्यादा घबराने लगते हैं।
केस स्टडी: गूगल की जानकारी से बढ़ा डर
एक मामले में ब्रेन सर्जरी के बाद आईसीयू में भर्ती मरीज के परिजन इंटरनेट की जानकारी के आधार पर डॉक्टरों की सलाह पर शक करने लगे। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत ऑनलाइन जानकारी कई बार इलाज में बाधा बन जाती है।
दवा छोड़ने से बढ़ी बीमारी
एक अन्य डायबिटीज मरीज ने इंटरनेट पर साइड इफेक्ट्स पढ़कर दवा बंद कर दी, जिसके बाद उसकी शुगर अनियंत्रित हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। डॉक्टरों का कहना है कि बिना सलाह दवा छोड़ना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार इंटरनेट जानकारी दे सकता है, लेकिन सही निदान और इलाज डॉक्टर की सलाह से ही संभव है। इसलिए किसी भी बीमारी को लेकर ऑनलाइन सर्च करने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।