जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा रोड स्थित जॉनसन स्कूल की मनमानी से एक छात्रा दसवीं बोर्ड परीक्षा देने से वंचित हो गई। स्कूल में बुधवार की सुबह हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई।
आरोप है कि स्कूल फीस जमा नहीं करने के चलते स्कूल प्रबंधन ने उक्त छात्रा को एडमिट कार्ड नहीं दिया। दरअसल दसवीं कक्षा की एक छात्रा को एडमिट कार्ड नहीं दिए जाने से वह एग्जाम नहीं दे पाई। प्रबंधन के अनुसार छात्रा की लगभग 9 हजार रुपये फीस बकाया थी। स्कूल का कहना है कि प्राचार्य द्वारा छात्रों को एडमिट कार्ड वितरित किए गए थे और छात्रा को परीक्षा में बैठने के लिए कहा गया था। इस बात की जानकारी जैसे ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को लगी तो वो स्कूल जा पहुंचे। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और विरोध स्वरूप स्कूल में ताला जड़ दिया।
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि फीस के अभाव में छात्रा का भविष्य खतरे में डालना अनुचित है। बताया गया कि दसवीं कक्षा की छात्रा की पारिवारिक आर्थिक स्थिति कमजोर है। छात्रा को निःशुल्क ट्यूशन देने वाले शिक्षक पराग दीवान ने बताया कि छात्रा की मां घर-घर जाकर काम करती हैं, जिसके कारण वे समय पर फीस जमा नहीं कर पाईं। छात्रा ने पूरे वर्ष अच्छी पढ़ाई की, लेकिन फीस बकाया होने के कारण उसे तिमाही, छमाही और अंततः वार्षिक परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया गया। जबलपुर महानगर महामंत्री आर्यन पुंज ने आरोप लगाया कि छात्रा के परिजन पूर्व में भी फीस के संबंध में प्राचार्य से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं कराई गई। स्कूल प्रबंधन पर छात्रा के भविष्य से खिलवाड़ करने और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है।