भोपाल।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘श्री महाकाल वन मेला-2026’ का शुभारंभ करते हुए कहा कि वन प्रदेश की प्राकृतिक पूंजी हैं और इनके संरक्षण के साथ जनजातीय समुदायों की आर्थिक मजबूती भी जुड़ी हुई है। उन्होंने महाकाल स्मृति उपहार किट और ‘महाकाल वन प्रसादम्’ का भी लोकार्पण किया।
जनजातीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन मेले प्रदेश की जैविक और वानस्पतिक विविधता को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। इनके जरिए जनजातीय भाई-बहनों को वनोपज, जड़ी-बूटियां और काष्ठ शिल्प उत्पाद बेचने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी आय बढ़ती है और स्थानीय कला को पहचान मिलती है।
आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों में से एक को उज्जैन में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन मेले में प्राकृतिक रंग-गुलाल, आयुर्वेदिक उत्पाद और नाड़ी वैद्य की सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।
16 फरवरी तक चलेगा महाकाल वन मेला
उज्जैन के दशहरा मैदान में आयोजित यह मेला 16 फरवरी तक चलेगा, जिसमें प्रदेशभर से आए कारीगरों और संग्राहकों के करीब 250 स्टॉल लगाए गए हैं। यहां बांस और काष्ठ से बने एथनिक क्राफ्ट आइटम्स, महुआ के लड्डू, श्रीअन्न से बनी मिठाइयां और विभिन्न वन उत्पाद उपलब्ध हैं।
‘महाकाल वन प्रसादम्’ और विशेष सम्मान
मुख्यमंत्री ने विंध्य हर्बल के प्राकृतिक गुलाल और ‘महाकाल वन प्रसादम्’ का शुभारंभ किया। साथ ही पन्ना जिले के वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार को वनौषधियों के संरक्षण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
जनजातीय आय बढ़ाने की दिशा में पहल
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन मेले जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाने और पर्यावरण जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार मप्र लघु वनोपज संघ के जरिए करीब 30 लाख जनजातीय संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है।
