भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में वर्ष 2005 में की गई संविदा नियुक्तियों में आरक्षण नियमों के कथित उल्लंघन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस संबंध में एनएसयूआई के प्रदेश सचिव अमन पठान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2005 में विश्वविद्यालय में की गई कुछ संविदा नियुक्तियाँ मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के अनुरूप नहीं थीं। आरोप है कि आरक्षण का लाभ ऐसे अभ्यर्थियों को दिया गया, जो राज्य के मूल निवासी नहीं थे, जबकि शासन की नीति के अनुसार यह लाभ केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासियों को ही दिया जाना चाहिए।अमन पठान ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि इन नियुक्तियों को लेकर पूर्व में भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय में विवाद की स्थिति बनी और कुछ लोगों ने इस्तीफे भी दिए, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो पूरे मामले की समग्र जांच कराई गई और न ही आरक्षण नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई।इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए अमन पठान ने कहा कि वर्ष 2005 की नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर आपत्तियां उठती रही हैं, लेकिन हर बार मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि अब तक न तो किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई गई और न ही कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों पर कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित नियुक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।एनएसयूआई प्रदेश सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि यह विषय केवल नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, आरक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता और शासन की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इस मामले में जांच और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है, तो संगठन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने पर विचार करेगा।
