New Delhi Legal News: चेक बाउंस मामले में कॉमेडियन राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा है, जिसके बाद लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सजा काट लेने से बकाया रकम से राहत मिल जाती है या फिर कानून के तहत भुगतान करना ही पड़ता है? आइए समझते हैं चेक बाउंस केस का पूरा मायाजाल और राजपाल यादव से जुड़ा यह चर्चित मामला।
क्या होता है चेक बाउंस केस?
जब कोई व्यक्ति बैंक में भुगतान के लिए दिया गया चेक पर्याप्त बैलेंस न होने या अन्य वजहों से क्लियर नहीं होता, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है। भारतीय कानून के तहत यह अपराध नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत आता है, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। जेल की सजा केवल अपराध के लिए होती है, लेकिन इससे बकाया रकम चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
क्या है राजपाल यादव का मामला?
पूरा विवाद साल 2010 से शुरू हुआ, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए दिल्ली के एक कारोबारी से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए। ब्याज और पेनल्टी के साथ यह रकम अब करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर किया सरेंडर
वर्षों पुराने इस केस में सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्रवाई तेज की, जिसके बाद राजपाल यादव ने बीते गुरुवार को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया। जेल जाने से पहले उन्होंने आर्थिक तंगी और मुश्किल हालात का जिक्र भी किया।
क्या जेल की सजा से खत्म हो जाएगी रकम?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक चेक बाउंस मामलों में जेल की सजा काट लेने के बाद भी बकाया राशि चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। अदालत आरोपी को सजा के साथ-साथ भुगतान का आदेश भी दे सकती है। यानी जेल जाना और पैसा लौटाना, दोनों अलग-अलग कानूनी पहलू हैं।