रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में राजस्व विभाग का एक गंभीर मामला सामने आया है। हुजूर तहसील में पदस्थ तहसीलदार पर जमीन के नामांतरण के बदले प्लॉट लेने का आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार प्लॉट की रजिस्ट्री तहसीलदार के परिजनों के नाम कराई गई, जबकि संबंधित नामांतरण की कार्रवाई लंबित ही रही। मामले की शिकायत लोकायुक्त एसपी से की गई है, जिसके बाद जांच शुरू हो गई है।
नामांतरण फाइल लटकी, फिर रखी गई शर्त
जानकारी के अनुसार रीवा हुजूर तहसील अंतर्गत करही क्षेत्र की एक जमीन का नामांतरण प्रकरण तहसील कार्यालय में विचाराधीन था। आरोप है कि फाइल कई दिनों तक लंबित रखी गई। इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए भूमि स्वामी के सामने प्लॉट देने की शर्त रखी गई।
शिकायत में कहा गया है कि प्लॉट की मांग पूरी होने के बाद संबंधित भूमि की रजिस्ट्री तहसीलदार के परिजनों के नाम करा दी गई, लेकिन इसके बावजूद नामांतरण की कार्रवाई नहीं की गई। खुद को ठगा महसूस करने पर पीड़ित पक्ष ने लोकायुक्त एसपी रीवा से शिकायत की।
लाड़ली लक्ष्मी मार्ग पर स्थित है जमीन
बताया जा रहा है कि विवादित भूमि शहर के लाड़ली लक्ष्मी मार्ग के किनारे स्थित है, जहां प्लॉटिंग का कार्य चल रहा था। विवाद के चलते पिछले कुछ महीनों से खरीदी-बिक्री भी प्रभावित है। यह भूमि जबलपुर के विवेकानंद वार्ड निवासी ऊमा सिंह ठाकुर व अन्य की बताई जा रही है। प्लॉटिंग कर विक्रय की पावर ऑफ अटॉर्नी भोला सिंह पिता वीरन सिंह को दी गई थी। आरोप है कि इसी प्लॉटिंग में से दो प्लॉट तहसीलदार के परिजनों के नाम दर्ज कराए गए।
पटवारी बने रजिस्ट्री में गवाह
शिकायत में दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि परिजनों के नाम हुई रजिस्ट्री में संबंधित पटवारियों को गवाह बनाया गया। आरोप यह भी है कि तहसीलदार को भूमि मिलने के बाद पटवारियों ने भी दबाव बनाना शुरू कर दिया था।
मामले में बोदाबाग-करही हलका में पदस्थ पूर्व महिला पटवारी और उससे पहले पदस्थ पुरुष पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने महिला पटवारी को करही हलका से हटाकर पहले लक्ष्मणपुर भेजा, बाद में उन्हें मैदानी क्षेत्र में पदस्थ कर दिया गया।
लोकायुक्त ने जारी किए नोटिस
लोकायुक्त एसपी सुनील पाटीदार ने पुष्टि की है कि तहसीलदार हुजूर और संबंधित पटवारियों के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई है। परिजनों के नाम प्लॉट की रजिस्ट्री कराए जाने के आरोपों की जांच की जा रही है। सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर बयान के लिए तलब किया गया है।
अवैध प्लॉटिंग और नए तरीकों पर सवाल
शहर में अवैध प्लॉटिंग के बढ़ते मामलों के बीच इस प्रकरण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नकद लेन-देन में लोकायुक्त कार्रवाई का खतरा होने से कुछ अधिकारी काम के बदले जमीन लेने जैसे तरीकों का सहारा ले रहे हैं।
रीवा में इससे पहले भी भू-अर्जन की राशि निजी बैंकों में जमा कराने का मामला सामने आ चुका है, जिसमें राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई थी। फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है और पूरे मामले पर जिलेभर में चर्चा बनी हुई है।