पांढुर्णा: मध्य प्रदेश के नए नवेले जिला पांढुर्ना ने कमाल कर दिया है। जिसके चलते प्रदेश में जमकर सराहना हो रही है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया पूरी में करने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पांढुर्णा में एसआईआर से संबंधित सभी काम शत-प्रतिशत पूरे कर लिए गए है। सबसे पहले यह कार्य पूरा करके पांढुर्णा ने प्रदेश भर में अलग पहचान बना ली है।
SIR प्रक्रिया प्रदेश में सबसे पहले की पूरी
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को सही करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सहित देश के 12 राज्यों में एसआईआर अभियान चलाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के नए जिले पांढुर्णा ने सबसे पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया का काम पूरा कर पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। जिले में एसआईआर से संबंधित सभी काम शत-प्रतिशत पूरे कर लिए गए है। यह जानकारी एसडीएम अल्का इक्का द्वारा दी गई है।
15,551 वोटरों के देखे गए कागज
एसडीएम अल्का इक्का ने बताया, एसआईआर अभियान के दौरान पांढुर्णा के कुल 4,18,292 मतदाताओं के रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण किया गया। इस दौरान 15,551 मतदाताओं को नो मौपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज के कारण नोटिस जारी किए गए। प्रारंभिक रूप से इन मामलों की सुनवाई 14 ईआरओ और एईआरओ द्वारा की गई लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज के मामलों की संख्या ज्यादा होने की वजह से प्रशासन ने अतिरिक्त एईआरओ नियुक्त किए गए, जिससे सुनवाई प्रक्रिया को सही समय में पूरा किया जा सका।
554 मतदान केंद्रों में हुआ काम
जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर नीरज वशिष्ठ ने बताया कि पूरी कार्रवाई कुल 554 मतदान केंद्रों में की गई। जिनमें विधानसभा क्षेत्र 125 सौंसर से 276 मतदान केंद्र और विधानसभा क्षेत्र 128 पांढुर्णा-278 मतदान केंद्र सम्मिलित रहे. इस अभियान में 37 चुनाव अधिकारी (ईआरओ और एईआरओ), 554 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और 52 सुपरवाइजर ने काम किया। इसमें नोटिस देने, मतदाताओं की सुनवाई, अभिलेखों का परीक्षण एवं सत्यापन की कार्रवाई पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की गई।
611 मतदाता सूची से हटाए गए
आंकड़ों के अनुसार नो मैपिंग ग्रेड में 5,852 मतदाता तथा लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज ग्रेड में 47,172 मतदाता शामिल रहे. सुनवाई एवं जांच के बाद निर्वाचन नियमों के अनुसार 611 मतदाता अपात्र पाए गए, जिनके नाम मतदाता सूची से नियमानुसार हटाए गए।
छिंदवाड़ा से अलग होकर बना पांढुर्णा जिला
पांढुर्णा जिला का गठन अक्टूबर 2023 में हुआ था। छिंदवाड़ा जिले से अलग होकर बने इस जिले में पांढुर्णा और सौसर तहसील को मिलाया गया है। महाराष्ट्र के नागपुर जिले से सटे इस जिले में मूल रूप से मराठी भाषा बोली जाती है, यहां सबसे ज्यादा संतरे और कपास की उपज होती है। आर्थिक स्थिति खेती पर ही निर्भर है।

