सिंगरौली। जिले के जीवनदायिनी माने जाने वाले रिहंद जलाशय में हजारों मछलियों के मृत मिलने से पूरे क्षेत्र में हडक़ंप मच गया है। जलाशय के किनारों पर बड़ी संख्या में तैरती और सड़ती मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जा रहे दूषित पानी और राख मिश्रित अपशिष्ट ने जलाशय के पानी को जहरीला बना दिया है, जिसका असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से जलाशय के पानी का रंग और गंध बदल गई थी। कई स्थानों पर पानी की सतह पर झाग और राख जैसी परत दिखाई दे रही थी। इसके बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई गंभीर कदम नहीं उठाया। अब हजारों मछलियों की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और प्रदूषण नियंत्रण के दावों की पोल खोल दी है। रिहंद जलाशय पर सिंगरौली और आसपास के हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। इसी जलाशय के पानी का उपयोग घरेलू जरूरतोंए खेती और अन्य कार्यों में किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल गहराने लगा है कि जब यह पानी जलीय जीवों के लिए सुरक्षित नहीं बचाए तो इंसानों के स्वास्थ्य पर इसका कितना गंभीर असर पड़ सकता है। क्षेत्रीय लोगों ने आरोप लगाया कि जिले में संचालित कई बड़ी औद्योगिक कंपनियां लगातार पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर रही हैं। फ्लाई ऐश डैम टूटने और राख बहकर जल स्रोतों में मिलने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैंए लेकिन हर बार जांच और कार्रवाई के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। लोगों का कहना है कि उद्योगों और प्रशासन की मिलीभगत के कारण प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। मामले को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर प्रदेश में आम जनता की जिंदगी से ज्यादा अहम उद्योगपतियों का मुनाफा हो गया है,तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
कठोर कार्यवाही की उठी मांग
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर लगातार हो रहे प्रदूषण और जल स्रोतों के दूषित होने पर जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। लोगों ने प्रशासन से जलाशय के पानी की तत्काल वैज्ञानिक जांच कराने, दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या बड़े जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।