सतना। सिन्धी कॉलोनी स्थित श्री संतधाम उदासीन आश्रम में पीठाधीश्वर महंत स्वामी ईश्वरदास उदासीन जी के सानिध्य में 30 दिवसीय आयोजित भक्ति अमृत महोत्सव के अवसर पर मंगलवार को प्रातः से ही आश्रम में भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा आश्रम परिसर में स्थापित भगवान विष्णु के अवतार पुरुषोत्तम भगवान भगवान गणेश हनुमान जी व राधा कृष्ण एवं भोलेनाथ की प्रतिमाएं एवं आधुनिक आर्ट से सजा मंच आकर्षण का केंद्र बना है। आश्रम के ओमप्रकाश उदासीन जी ने भक्ति अमृत महोत्सव पर प्रकाश डालते हुए बताया आश्रम में प्रत्येक दिन प्रातःश्री रामचरित्र मानस श्री गुरु श्रीचंद्र सिद्धांत सागर अखंड पाठ साहब का भोग {लड़ी} एवं श्री शिव रुद्राभिषेक व यज्ञ हवन के साथ-साथ अन्नक्षेत्र {भोजन} वितरण किया जाता है। आश्रम के विनोद गेलानी ने बताया। शाम 6:00 बजे विशाल महाआरती एवं बाहर से पधारे संतों द्वारा सत्संग सुधा का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उसी कड़ी में मंगलवार को भोपाल से पधारे महन्त तुलसीदास जी ने अपने व्याख्यान में कहा कि उदासीन परम्परा अति प्राचीन परम्परा है जो कि सनकादिक ऋषियों से चली आ रही है, जिसमें अनेक संत महात्मा हुए हैं, कालांतर में गुरु नानक देव जी के सुपुत्र बाबा श्रीचन्द्र जी ने उदासीन परम्परा को पुनर्स्थापित किया तथा बिखरते सनातन समाज को नई दिशा प्रदान की, आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व जब देश में मुगलों का शासन था तब बिखरते सनातन समाज को संगठित करने के लिए भगवान श्रीचन्द्र जी ने अनेक उदासीन साधुओं को चैतन्य किया एवं उन्हें लोक कल्याणकारी कार्य करने की प्रेरणा दी जो कि आज तक जारी है। महंत तुलसीदास जी ने बताया कि उदासीन का अर्थ है तटस्थ निर्लेप, विरक्त, उच्च अवस्था प्राप्त महात्मा; ऐसे अनेकों* *उदासीन संत, महंत, मण्डलेश्वर देश भर में पुरुषोत्तम मास में अन्न क्षेत्र, यज्ञ, कथा एवं अन्य धार्मिक कार्य आयोजित कर रहे हैं, जिससे समाज का लोक परलोक सुधरे एवं साथ ही राष्ट्रप्रेम की भावना भी मजबूत हो। 17 मई से पुरुषोत्तम मास प्रारंभ हो गया है जो कि 15जून तक चलेगा सतना नगर का ‘संत धाम’ उदासीन आश्रम है, जिसके वर्तमान पीठाधीश्वर महंत स्वामी ईश्वर दास जी हैं, जिन्होंने पूरे मास भर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करने का संकल्प लिया है।