■ मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन
सतना। नगर निगम के लिए दौड़ने वाली एक कचरा गाड़ी के अचानक अनियंत्रित होकर पलट जाने से गाड़ी में सवार हेल्पर गाड़ी के नीचे दबकर घायल हो गया। इलाज के लिए ले जाते वक्त रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। मौत के बाद मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया।प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिले के सभापुर थाना क्षेत्र के बडखेरा का मूल निवासी भइया लाल 39 पिता कोदईला बंशकार सतना में कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत घूरडांग में रहता था और नगर निगम के कचरा कलेक्शन वाहन में हेल्पर के तौर पर कार्यरत था।
ड्यूटी के दौरान टिकुरिया टोला ईंट भट्टा के पास कचरा गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हेल्पर भईयालाल गाड़ी के नीचे दब गया। उसे आसपास के लोगों की मदद से निकालकर जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जबलपुर के लिए रेफर कर दिया। सतना कटनी के बीच उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर सीधे कोलगवां थाना पहुंच गए। इनके द्वारा मुआवजे की मांग की गई। पुलिसकर्मियों ने समझाइश देकर शव को जिला अस्पताल की मरचुरी में रखवाया। तकरीबन चार घंटे तक परिजनों ने शव नहीं लिया। अंतत: कचरा वाहन का संचालन करने वाली रेमकी कंपनी द्वारा 50 हजार रुपए तत्काल सहायता राशि दी गई। इसके अलावा 8 लाख रुपए क्षतिपूर्ति, मृतक की पत्नी को आजीवन 8 हजार रुपए पेंशन और मृतक के बेटे को नौकरी
कंपनी द्वारा दिए जाने का भरोसा दिलाया गया। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से 25 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई साथ ही दुर्घटना बीमा क्लेम भी मृतक के परिवार को मिलने का आश्वासन दिया गया तब परिजनों ने शव को लिया।
बताते हैं कि परिजन 50 लाख रुपए क्षतिपूर्ति दिए जाने सहित परिवार के एक सदस्य को नियमित नौकरी देने की मांग कर रहे थे। दोपहर करीब 1 बजे से शुरू हुआ यह घटनाक्रम शाम लगभग 5 बजे तक चला। इस दौरान कोलगवां टीआई सुदीप सोनी एवं तहसीलदार सौरभ मिश्रा ने परिजनों को काफी समझाइश दी। जब एसडीएम राहुल सिलाड़िया पहुंचे उन्होंने कचरा प्रबंधन कंपनी रेमकी के प्रतिनिधि की मौजूदगी में परिजनों से बातचीत की तब दोनों पक्ष की आपसी बातचीत के बाद सहमति से समाधान संभव हुआ। इस बीच बसपा नेता सुभाष शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन और रेमकी कंपनी के प्रतिनिधि को बताया कि मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। भैयालाल की पत्नी एक किडनी के सहारे जीवन जी रही है, उनका एक पुत्र दिव्यांग है। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह भैयालाल पर ही थी। ऐसे में उसकी मौत के बाद परिवार पर दु:ख का पहाड़ टूट पड़ा है।
