नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को कर्नाटक के शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र के 2023 चुनाव की मतगणना से जुड़े एक मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने चुनाव आयोग के उस तर्क को “लचर बहाना” कहते हुए खारिज कर दिया, जिसमें आयोग ने मूल मतगणना का वीडियो गायब होने का दावा किया था। न्यायमूर्ति संजय कुमार की बेंच ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं और निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वह अगली सुनवाई में चुनाव से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश करने में विफल रहता है, तो कोर्ट आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालेगी।
यह विवाद 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में शृंगेरी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार टी.डी. राजेगौड़ा और भाजपा के डी.एन. जीवराज के बीच का है। राजेगौड़ा ने यह चुनाव 201 वोटों के मामूली अंतर से जीता था, जिसे जीवराज ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
अप्रैल, 2026 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मई, 2026 में पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती की गई, जिसमें राजेगौड़ा के वोट कम हो गए और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। राजेगौड़ा ने इस पुनर्मतगणना की प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। कोर्ट में अपनी याचिका में राजेगौड़ा ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच का आदेश दिया था, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर ने गैर-कानूनी तरीके से 562 वैध पोस्टल बैलेट पर फिर से विचार किया, जो राजेगौड़ा के पक्ष में थे।
इस चुनावी गड़बड़ी की जांच और पारदर्शिता के लिए उच्चतम न्यायालय ने 2023 की मूल मतगणना और दोबारा हुई गिनती के वीडियो रिकॉर्ड मांगे थे। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि मई, 2026 की दोबारा गिनती का वीडियो तो सुरक्षित है, लेकिन 2023 की मूल मतगणना का वीडियो उसे मिल नहीं रहा है। इसी दावे पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है।
फिलहाल, उच्चतम न्यायालय के मई, 2026 के अंतरिम आदेश के अनुसार याचिका लंबित रहने तक टी.डी. राजेगौड़ा विधायक पद पर बने हुए हैं और कोर्ट ने आयोग को अगली सुनवाई में सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है।
