नई दिल्ली। SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे राहुल-प्रियंका सहित अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेते हुए बस में भर ले गई। पुलिस जब रात 8 बजे राहुल को हटाने पहुंची, तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया। राहुल और प्रियंका गांधी 7 घंटे से ज्यादा समय से दिल्ली के आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे थे।दरअसल राहुल, ज्ञानेश कुमार से मिलने के लिए धरने पर बैठै थे। उन्होंने कहा था,वे बिना मिले कहीं नहीं जाएंगे।कांग्रेस सांसदों, नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी) और ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने विरोध मार्च में भाग लिया।पुलिस ने कई पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और सांसदों को हिरासत में ले लिया क्योंकि उन्होंने पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश की।
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए पुलिस बैरिकेड को लांघ दिया। बाद में, वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रियंका गांधी वाड्रा, सांसद पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य नेताओं के साथ आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठ गए। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के धरने के कारण आकाशवाणी के सामने दिनभर हंगामा होता रहा क्योंकि पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस कर्मियों द्वारा उन्हें अलग-अलग बसों में भरकर ले जाया गया। शाम में मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, “सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलेंगे और उन्हें मिलना ही होगा। सांसद देश की आवाज हैं और उनका अपमान किया गया है। हम बस चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते हैं और उन्हें बताना चाहते हैं कि आपने वोट चोरी की है। उन्होंने कहा, “हमें यहां बैठने में कोई दिक्कत नहीं है। हम यहां आराम से है। हमने यहां गद्दे बिछाए है। यहां टॉयलेट है और चाय भी मिलती है। जब तक हमें जरूरत होगी, हम यहां बैठेंगे। हम यहां ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। अगर सरकार को हमारे यहां बैठने से दिक्कत है, तो वह हमें बताए कि कहां बैठकर प्रदर्शन करें—हम वहीं बैठेंगे।
राहुल बोले- 300 सांसदों को ज्ञानेश कुमार से मिलने से रोका
राहुल गांधी ने कहा- 300 लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आए थे। हम चाहते थे ज्ञानेश कुमार और उनके दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। पुलिस ने हमें रोका। चुनाव आयोग से 50 गज दूर बैठाकर रखा है हमें जाने नहीं दे रहे हैं। 300 सांसद ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। अगर जनप्रतिनिधियों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र का क्या मतलब है। सवाल पूछने पर राहुल ने नाराजगी जताई और कहा कि क्या मैं आपको भाजपा का कार्यकर्ता लगता हूं। भाजपा जो बोले मुझे उसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है। मैं लोकतंत्र बचाने यहां खड़ा हूं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। देश के युवा ये बात जानते हैं। चुनाव को मोदी-शाह ने हाइजैक किया है और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है। यहां पुलिस वाले भी यही कर रहे हैं। इनमें से कोई भी बचकर नहीं जाएगा। जो इन्होंने देश के साथ किया है, वह देशद्रोह है।
इनका कहना है…
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “पहले भी चुनाव आयोग पर आरोप लगे हैं, चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022, 2024 में बेईमानी की और बंगाल में पूरा का पूरा खुला खेल किया…चंडीगढ़ चाल कौन भूल जाएगा?”
हम अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं-कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “हम अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं… सरकार आज़ादी के बाद मिले वयस्क मताधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है और CEC सरकार की कठपुतली है। वो वही करते हैं जो मोदी और शाह कहते हैं…हम लड़ते रहेंगे…”
गली-गली में शोर है, मोदी-ज्ञानेश चोर है- RJD सांसद मनोज झा
RJD सांसद मनोज झा ने कहा, “कोशिश तो करेंगे लेकिन अगर अहंकार इस स्तर पर है तो वो डर का भी द्योतक है। नारे लग रहे हैं गली-गली में शोर है, मोदी-ज्ञानेश चोर है। अब वो कठपुतली की ढोल जिनके हाथ में है उनका भी जिक्र हो रहा है…”
शिवराज सिंह बोले- यह जनादेश का अपमान है
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह जनादेश का अपमान है। यह लोकतंत्र की चिंता नहीं, हार की खीझ है। विपक्ष जनादेश का अपमान कर रहा है।
विपक्षी गठबंधन की 5 मांगें
1. CEC के इस्तीफे की मांग की: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार से इस्तीफा दें। उन्होंने मतदाता सूची में कथित दखल की जांच में सहयोग करने की भी बात कही।
2. मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग: वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की पूरी जानकारी बूथ और विधानसभा स्तर पर सार्वजनिक होनी चाहिए। किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले नोटिस और अपील का मौका मिलना चाहिए।
3. SIR और वोटर के नाम हटाने पर सवाल: SIR से बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। भविष्य के चुनावों में SIR से पहले की मतदाता सूची इस्तेमाल की जाए।
4. EVM की जगह बैलट पेपर की मांग: EVM की जगह चुनाव में फिर से बैलट पेपर इस्तेमाल हो। पहली बार वोट देने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान है।
5. विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील: INDIA गठबंधन के दल चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के मुद्दे पर एकजुट रहें। लोकतंत्र में अंतिम अधिकार जनता का होना चाहिए।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिये बैठक के लिए समय नहीं मांगा था
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने मंगलवार शाम प्रेस रिलीज़ जारी अपनी स्थिति स्पष्ट की। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विपक्ष के सांसदों के साथ चुनाव आयोग कार्यालय जाना चाहते थे और चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक लिया। आयोग ने जारी प्रेस नोट में कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिये बैठक के लिए समय नहीं मांगा था। चुनाव आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए पहले से तय प्रक्रिया है, जिसके तहत अधिकृत प्रतिनिधि समय मांगते हैं और आपसी सहमति से बैठक तय होती है।आयोग ने बताया कि उसे बाद में जानकारी दी गई कि 240 सांसदों के समूह के साथ संसद भवन एनेक्सी में बैठक का प्रस्ताव रखा गया था।आयोग ने इसे असामान्य बताते हुए कहा कि प्रोटोकॉल के तहत ऐसी मुलाकातें चुनाव आयोग के परिसर में ही होती हैं। प्रेस नोट के मुताबिक, आयोग ने समाधान के तौर पर अपने सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए भेजने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। चुनाव आयोग के दफ़्तर तक जाने से रोके जाने पर राहुल गांधी आकाशवाणी भवन परिसर के भीतर बैठ गए थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

