इमामुद्दीन सिद्दीकी, सतना। कानून के जानकारों के मुताबिक मेडिकल नेगलिजेंस यानी चिकित्सा लापरवाही का अर्थ है डॉक्टर या अस्पताल द्वारा इलाज में उचित सावधानी न बरतना, जिससे मरीज को नुकसान या मृत्यु हो। अब, भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत, डॉक्टर की लापरवाही से मौत पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है (धारा 106)। इसके अलावा पीड़ित उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता अदालतों में भी हर्जाने का दावा कर सकते हैं।
कानून होते हुए भी यहां अब तक किसी डॉक्टर या चिकित्सा संस्थान के खिलाफ कोई कार्रवाई किए जाने का मामला प्रकाश में नहीं आया है जबकि इलाज और जांच में लापरवाही किए जाने के आरोप को लेकर न केवल कई बार हंगामा हुआ बल्कि स्वास्थ्य विभाग से लेकर पुलिस तक शिकायत भी हुई हैं। जांच टीम बनाए जाने की जानकारी तो सामने आती है लेकिन जांच में क्या मिला यह जल्द उजागर नहीं होता।
[ केस 1 ]
अभी हाल ही के चर्चित प्रकरणों पर बात करें तो थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिए जाने के मामले में जांच चल ही रही है। ब्लड बैंक के अधिकारी और कर्मचारी के निलंबन से आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यानी अब तक यह तय नहीं हो सका कि मासूम बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने के लिए हकीकत में जिम्मेदार कौन है। सूत्रों की माने तो इस मामले में अब तक आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध नहीं कराया जा सका है।जांच कब पूरी होगी, क्या तथ्य निकल कर सामने आएंगे,बेकसूर मासूम बच्चों को न्याय कब मिलेगा,इनके दोषियों को सजा कब मिलेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता।
[ केस 2 ]
नगर परिषद उचेहरा के अध्यक्ष निरंजन प्रजापति ने सतना डायग्नोस्टिक सेंटर में अपनी सोनोग्राफी कराई। उनकी जांच रिपोर्ट में गर्भाशय का उल्लेख किया गया जोकि पुरुष में होना संभव नहीं है। इस लापरवाही की शिकायत सिटी कोतवाली में की गई। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने डॉक्टर अरविंद सराफ को नोटिस जारी कर मामले में उनका जवाब मांगा। इसके बाद मामला ठंडा हो गया। पुरुष की अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट में गर्भाशय का लेख करना,अपने आप में प्रदर्शित करता है कि रिपोर्ट बनाने में लापरवाही तो हुई लेकिन इसके बावजूद निरंजन की शिकायत पर न तो अपराध दर्ज हुआ और न स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित चिकित्सक या उसके संस्थान पर कोई कार्रवाई की गई।
[ केस 3 ]
3 अप्रैल को बिरला अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ था। आरोप था कि ब्रेन की सर्जरी के लिए भर्ती महिला मरीज की किडनी निकाल ली गई। यह महिला जमुनिया बाई साकेत 50 पति रामबल साकेत जिले के सभापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम माजन की रहने वाली थी। पुलिस और प्रशासन के हस्ताक्षेप के बाद जैसे तैसे मामला शांत हुआ था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन को 1लाख 87 हजार 307 रुपए मरीज को लौटाने पड़े थे। यह रकम इलाज के दौरान मरीज ने खर्च की थी। सवाल आज भी काबिज है कि अस्पताल का कोई दोष नहीं था तो अस्पताल प्रबंधन इलाज के लिए प्राप्त रकम को लौटाने के लिए क्यों राजी हुआ।
[ केस 4 ]
बीते दिनों पाठक हास्पिटल में हंगामा हुआ था। पन्ना जिले के देवेंद्रनगर के रहने वाले रवि रजक को किडनी स्टोन बताकर इस अस्पताल में आपरेशन किया गया था। बाद में इलाज के दौरान रीवा में उसकी मौत हो गई थी। इसके लिए परिजनों ने पाठक हास्पिटल के डॉक्टर राजीव पाठक और पुष्पेंद्र सिंह यूरोलाॅजिस्ट को जिम्मेदार ठहराते हुए इन पर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की थी। आरोप था कि मरीज की जो किडनी बिल्कुल ठीक थी, आपरेशन के दौरान उसमें चीरा मारकर धागे से बांध दिया गया था।यह बात छिपाकर मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, ब्लीडिंग और इंफेक्शन से मरीज की हालत खराब होती गई और उसे बचाया नहीं जा सका। परिजनों की शिकायत पर जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, फिलहाल किसी तरह की कार्रवाई किए जाने की खबर नहीं है।
[ केस 5 ]
पाठक हास्पिटल में इलाज में लापरवाही किए जाने की एक शिकायत माधवगढ बरहा के रहने वाले मोटर मैकेनिक हिमांशु 31 पिता राजीव लोचन कुशवाहा द्वारा 13 अक्टूबर 2025 और इसके बाद भी कई स्तर पर की गई थी। इन्होंने भी डॉक्टर राजीव पाठक और पुष्पेंद्र सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। इनका आरोप था कि इनकी किडनी से स्टोन निकालने के लिए पाठक हास्पिटल में सर्जरी की गई जिसके बाद ब्लीडिंग और इंफेक्शन की समस्या हो गई। जब दोबारा सोनोग्राफी कराई तो पता चला कि सर्जरी के पहले की जांच में जिस साइज का स्टोन जहां था, सर्जरी के बाद भी उसी साइज में उसी जगह है। तब रीवा के एक अस्पताल में सर्जरी करानी पड़ी जिसके बाद आराम मिला। इनकी शिकायत पर जांच के लिए सीएमएचओ ने 24 अक्टूबर 2025 को एक टीम बना दी थी। इस टीम में डॉक्टर आलोक खन्ना, नलिनी शुक्ला एवं विनय मोहन तिवारी थे। शायद जांच टीम को शिकायत के मुताबिक कोई ठोस तथ्य नहीं मिले अन्यथा कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आती। जांच टीम को जांच में क्या मिला,पता नहीं लेकिन सवाल तो अब भी है कि कथित सर्जरी के पहले और बाद की सोनोग्राफी में स्टोन का साइज एक जैसा कैसे प्रदर्शित है जबकि सफल सर्जरी के बाद की जांच में तो स्टोन प्रदर्शित ही नहीं होना चाहिए था। अगर मरीज का आपरेशन कर स्टोन निकाल दिया गया था तो दोबारा रीवा में मरीज को आपरेशन कराने की जरूरत क्यों पड़ी। रीवा के संबंधित अस्पताल से जानकारी लेने पर स्पष्ट हो सकता था कि उनके यहां मरीज का आपरेशन हुआ या नहीं, हुआ तो किस साइज का स्टोन निकाला गया। लेकिन सूत्रों की मानें तो इस दिशा में जांच नहीं हुई, पुलिस ने भी 17 अक्टूबर को प्राप्त शिकायत पर जांच नहीं की।
[ केस 6 ]
सार्थक हास्पिटल में डॉक्टर रश्मि अग्रवाल द्वारा महिला मरीज के इलाज में लापरवाही किए जाने की शिकायत उसके पति द्वारा सीएमएचओ से की गई थी। नागौद तहसील के ग्राम अमिलिया के शिकायतकर्ता की शिकायत पर जांच के लिए सीएमएचओ डॉक्टर मनोज शुक्ला ने बीते दिनों जांच टीम गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। चार सदस्यीय टीम में डॉक्टर मंजू सिंह एवं डॉक्टर लक्ष्मी मोहनानी सहित अन्य को शामिल किया गया था। जांच रिपोर्ट देने का समय बीत चुका है,शायद यहां भी शिकायत के मुताबिक आरोप सही नहीं मिले।

