■ दुष्कर्म का आरोपी है भाजपा का पूर्व जिलाध्यक्ष
सतना। दुष्कर्म के आरोपी भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष सतीश शर्मा को सतना की तेज तर्रार होनहार पुलिस अब तक गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश नहीं कर सकी है। एक तरफ पुलिस को लंबे अर्से से सतीश की तलाश है, दूसरी तरफ सतीश जमानत के लिए हाथ पांव मार रहा है। जमानत की अर्जी यहां खारिज भी हो चुकी है। बड़ा सवाल है कि गुम इंसान, अपहरण और बलात्कार के आरोपियों को 24 से 48 घंटे के अंदर ढूंढ कर ले आने वाली सतना पुलिस अपराध दर्ज होने के महीनों बाद भी सतीश शर्मा को क्यों तलाश नहीं सकी है। सवाल यह भी है कि आमतौर पर किसी संगीन अपराध के आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास करते वक्त परिजनों को थाने में बिठाने, संपत्ति कुर्क करने और आरोपी की गिरफ्तारी पर ईनाम घोषित कराने, गिरफ्तारी के लिए मुखबिर और आधुनिक तकनीक से जुड़े सायबर सेल की सहायता लेने वाली पुलिस सतीश को गिरफ्तार करने में अब तक नाकाम क्यों है। क्या इस मामले में मुखबिर तंत्र और सायबर सेल पुलिस के काम नहीं आ रहा। अगर ऐसा लगता है कि सतीश कहीं छिप गया है और अब आसानी से उसके पकड़े जाने की कोई उम्मीद नहीं है तो फिर ईनाम की घोषणा क्यों नहीं की जा रही, अन्य वांछित आरोपियों की तरह थानों में सतीश का पोस्टर क्यों नहीं लग रहा। सतीश शर्मा की गिरफ्तारी पर हो रही देरी ने पुलिस की काबिलियत पर सवालिया निशान लगा दिया है क्योंकि पुलिस तो वो है जो तब भी अज्ञात आरोपियों को दबोच लाती थी जब कागज पर पेंसिल से स्केच बनता था, न सीसीटीवी कैमरा होता था और न मोबाइल फोन होता था जिससे लोकेशन ट्रेस की जाए। आज तो इस मामले में पुलिस के पास आरोपी सतीश की फोटो और परिजनों, रिश्तेदारों सब की जानकारी भी है। सवाल यह है कि आखिर सतीश कहां चला गया। उसकी आर्थिक सहायता कौन कर रहा है। वह कहां किसकी पनाह में है। क्या वह अपने किसी करीबी और परिचित के संपर्क में नहीं है।
[ सवाल: बेगुनाह है तो सरेंडर क्यों नहीं कर रहा ]
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा पर दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज है।यहां बता दें कि सतीश पर जब दुष्कर्म का संगीन इल्जाम लगा तो पार्टी से उसे फौरन निष्कासित कर दिया गया था। सूत्र बताते हैं कि बीते दिनों आरोपी सतीश कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका को अदालत ने यहां खारिज कर दिया था। कोर्ट ने पूर्व में खारिज की गई जमानत याचिका के बाद प्रकरण की परिस्थितियों में कोई बदलाव न होने का हवाला दिया था। अभियोजन के अनुसार, 5 अक्टूबर 2025 की शाम करीब 6:30 बजे पीड़िता ने कोलगवां थाना में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में शारीरिक संबंध बनाने के लिए जान से मारने की धमकी देने और पति को अच्छी नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। इस अपराध में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने पहली अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की थी, जिसे अदालत ने 10 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया था। इसके बाद, द्वितीय अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई।द्वितीय याचिका में अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग करते हुए यह तर्क दिया गया कि पूर्व जिलाध्यक्ष कथित तारीखों में जिले से बाहर थे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल थे। साथ ही, यह भी कहा गया कि पीड़िता को 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी, जिसे मांगने पर असत्य एफआईआर दर्ज कराई गई है।लगातार दूसरी बार अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद अब सवाल यह हो रहा है कि अगर सतीश शर्मा बेगुनाह हैं तो पुलिस के सामने समर्पण क्यों नहीं कर रहा।