■ नागौद राजघराने में हुई सनसनीखेज वारदात
इमामुद्दीन सिद्दीकी/सतना। जिले के उचेहरा थाना की परसमनिया पुलिस चौकी के क्षेत्र अंतर्गत बाबा राजा रूपेन्द्र सिंह की गढी में गोली चलने की घटना हुई है। गुरुवार 11 जून की दोपहर हुई घटना में राजपरिवार की बहू बाबा राजा रूपेन्द्र सिंह की पत्नी योगिता सिंह को गोली लगी है। रीवा के निजि अस्पताल में उनका इलाज जारी है। घटना के संबंध में पुलिस ने एक महिला सुनीता सिंह परिहार को गिरफ्तार किया है। यह महिला कौन है, राजपरिवार में इसका किससे क्या नाता है इस बात का खुलासा नहीं हुआ है। योगिता सिंह की मां नरेन्द्र कुमारी का कहना है कि घटना के वक्त सुनीता सिंह गढी में मौजूद थी उसने बंदूक से नौ राउंड फायर किए, बंदूक से निकली चौथी गोली योगिता के पेट में लगी।
गौरतलब है कि बाबा राजा रूपेन्द्र सिंह मध्यप्रदेश शासन के पूर्व गृह मंत्री, खजुराहो के पूर्व सांसद एवं वर्तमान नागौद विधायक भाजपा के कद्दावर नेता नागेंद्र सिंह के भतीजे हैं,जो परसमनिया में रहते हैं। नागौद राजघराने से ताल्लुक रखने वाले बाबा राजा की परसमनिया में गढी है। इसी गढी के अंदर गोली चलने की सनसनीखेज घटना हुई है,जिससे पूरे इलाके में सनाका खिंचा है।
[ बीएनएस की धाराओं में थाने में दर्ज हुआ अपराध ]
पुलिस के मुताबिक गोली लगने के बाद योगिता सिंह को तत्काल उचेहरा सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें सतना जिला अस्पताल भेज दिया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रीवा ले जाया गया। निजि अस्पताल में उनके शरीर से गोली निकाल दी गई है,उन्हें होश आ गया है। योगिता सिंह के बयान के आधार पर आरोपी सुनीता सिंह के खिलाफ उचेहरा थाना में अपराध क्रमांक 256 बीएनएस की धारा 296 बी एवं 109(1) के तहत 11जून को पंजीबद्ध किया गया था। शुक्रवार 12 जून को इसी अपराध में सुनीता सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।
[ आरोप : बाबा राजा को ब्लैकमेल कर रही सुनीता ]
योगिता सिंह ने पुलिस को जो जानकारी दी है उसके मुताबिक गुरुवार की दोपहर करीब 3 बजे वह अपने बेटे पृथु सिंह और भाई नागेंद्र सिंह राठौर के साथ परसमनिया अपने घर गईं थीं। वहां सुनीता सिंह परिहार अपशब्द बोलते हुए झगड़ा करने लगी जब उसे ऐसा करने से मना किया गया तो उसने जान से खत्म कर देने की नीयत से गोली चलाई जो पेट में बांई तरफ लगी। रिपोर्ट के मुताबिक योगिता सिंह ने अपने बेटे के ऊपर भी गोली चलाए जाने की बात कही है। रिपोर्ट में योगिता सिंह ने साफ कहा है कि उनके और उनके पति के बीच झगड़े का कारण यही सुनीता सिंह है। इसका उनसे और उनके परिवार से कोई लीगल रूप से संबंध नहीं है। यह उनके घर में उनके पति को ब्लैकमेल करके जबरन रह रही है। योगिता सिंह ने आरोप लगाया है कि सुनीता सिंह के द्वारा पहले भी उनके साथ मारपीट की गई थी जिस पर उचेहरा थाना पुलिस द्वारा कार्यवाही की गई थी।
[ बहूरानी को घर से निकालने का प्रयास ]
राजघराने से जुड़ी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इसी क्रम में सोशल मीडिया में योगिता सिंह की मां नरेंद्र कुमारी का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने अपने दामाद रूपेंद्र सिंह बाबा राजा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नरेंद्र कुमारी के मुताबिक सुनीता सिंह लंबे समय से बाबा राजा के संपर्क में है पिछले कई सालों से वह परसमानिया गढ़ी में नाजायज तरीके से रह रही है। यहां बता दें की योगिता सिंह ने घटनाक्रम के संबंध में जो बयान पुलिस को दिया है उसमें उन्होंने कहा है कि विवाद के दौरान सुनीता सिंह ने उन्हें घर से निकल जाने के लिए कहा। सुनीता ने उनसे कहा कि यह उसका घर है। बहरहाल, सुनीता सिंह कौन है इसका राजघराने से क्या नाता है इस पर हम बात नहीं कर रहे। घटना के बाद जो बातें सामने आईं उनमें ऐसा भी कहा जा रहा है कि उदयपुर से नागौद आईं योगिता सिंह जब अपनी मां नरेन्द्र कुमारी, भाई नागेंद्र सिंह राठौर और बेटे पृथु के साथ जब परसमनिया पहुंची तो उनके आने पर बाबा राजा खुश नहीं हुए। पति पत्नी के बीच कुछ कहासुनी हुई। इस दौरान नागेंद्र सिंह राठौर और बाबा राजा रूपेन्द्र सिंह यानि जीजा साले के बीच विवाद हो गया और नौबत मारपीट की आ गई। झगड़े के दौरान सुनीता ने एक कमरे की खिड़की से गोली चलाना शुरु कर दी। पुलिस के मुताबिक बाबा राजा रूपेन्द्र सिंह ने भी अपने साथ बदसलूकी और हमले से संबंधित रिपोर्ट नागेंद्र सिंह के खिलाफ की है। शिकायत मिलने पर बाबा राजा का मेडिकल भी उचेहरा अस्पताल में कराया गया है।
[ जांच के लिए नहीं पहुंची एफएसएल टीम ]
गोली किसने चलाई, क्यों चलाई, किस बंदूक से गोली चली, कुल कितने राउंड फायर हुआ यह सब अब जांच विवेचना का विषय है। लेकिन सूत्रों की माने तो उचेहरा पुलिस ने घटनास्थल की जांच के लिए एफएसएल की टीम नहीं बुलाई। जबकि जानकारों का कहना है कि गोली चलने जैसी घटना में एफएसएल टीम से जांच कराया जाना उचित माना गया है।गोली चलने की घटना में, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के बैलिस्टिक विभाग द्वारा यह सिद्ध करने के लिए वैज्ञानिक जांच की जाती है कि अपराध में किस हथियार का इस्तेमाल हुआ था, गोली किसने चलाई और किन परिस्थितियों में चलाई। एफएसएल द्वारा घटनास्थल से बरामद किए गए हथियार की जांच करके पता लगाया जाता है कि वह चालू हालत में है या नहीं। क्या उससे फायर किया जा सकता है, और कहीं हथियार में कोई बदलाव तो नहीं किया गया है।
अपराध स्थल से बरामद खाली कारतूस, बुलेट (छर्रे), या खोखों को प्रयोगशाला में संदिग्ध हथियार से टेस्ट फायर करके मिलाया जाता है। गोली चलने पर हथियार के फायरिंग पिन और बैरल की सूक्ष्म खरोंचें कारतूस पर छप जाती हैं, जो उंगलियों के निशान की तरह हर बंदूक के लिए अद्वितीय होती हैं। घटनास्थल और पीड़ित के कपड़ों या शरीर पर लगे बारूद के निशानों की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि गोली कितनी दूरी समीप या दूर से चलाई गई थी। दीवारों, खिड़कियों या वस्तुओं पर गोली के छेद और कोण की जांच करके यह पता लगाया जाता है कि शूटर किस दिशा और स्थिति में खड़ा था। गोली चलाने वाले व्यक्ति के हाथों, कपड़ों या संदिग्ध सतहों पर बारूद के रासायनिक अवशेषों बेरियम, लेड आदि की मौजूदगी का परीक्षण किया जाता है, जिससे यह साबित होता है कि उस व्यक्ति ने हाल ही में गोली चलाई थी या नहीं। हथियार की मैकेनिज्म ट्रिगर प्रेशर आदि की जांच करके यह तय किया जाता है कि गोली दुर्घटनावश चली या जानबूझकर चलाई गई थी।

