■ जगह जगह जलभराव, पानी ने खड़ी की परेशानी
सतना। वर्षा जीवन के लिए अनिवार्य है लेकिन जब यह अपनी सीमा पार कर जाती है तो यह एक गंभीर समस्या बन जाती है। अत्यधिक वर्षा जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। लगातार बारिश के कारण बुधवार को सतना शहर के लोग भी पानी की परेशानी से घिरे रहे। नगर के विभिन्न इलाकों में जलभराव रहा। महापौर योगेश कुमार ताम्रकार, नगर निगम आयुक्त नागार्जुन बी गौंडा, एसडीएम राहुल सिलाड़िया, सीएसपी देवेन्द्र प्रताप सिंह चौहान सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी जगह जगह जलभराव की स्थिति का जायजा लेते रहे। जलभराव से जहां सर्वाधिक स्थिति खराब मिली वहां प्राथमिकता के आधार पर जल निकासी का प्रबंध किया गया।
[विभिन्न इलाके प्रभावित]
शहर के रीवा रोड का बड़ा नाला उफान पर होने के कारण इस नाले के नजदीकी भाजपा कार्यालय और इसके आसपास बड़े पैमाने पर जलभराव रहा। इसी नाले के दूसरे हिस्से खेरमाई रोड की ओर भी नाले का पानी सड़क पर आने से लोगों को परेशानी हुई। शहर के विभिन्न हिस्सों में जलभराव की ऐसी स्थिति रही कि घरों के बाहर वाहन पानी में डूब गए, सड़कों की हालत तालाब जैसी हो गई, लोगों के घरों के भीतर पानी भर गया। सिविल लाइंस क्षेत्र की मास्टर प्लान कॉलोनी, बांधवगढ कॉलोनी के पिछले निचले हिस्से,भरहुत नगर कॉलोनी, मयूर बिहार कॉलोनी, पन्ना नाका उमरी, राजेन्द्र नगर, खूंथी, डालीबाबा, प्रेम नगर रेलवे अंडरब्रिज सहित अन्य स्थानों पर जलभराव होने की जानकारी सामने आई। ऐसे में नगर निगम के लोग आग लगने पर कुआं खोदते रहे।यानि जहां से सूचना मिली दौड़कर वहां जाकर जल निकासी की व्यवस्था बनाते रहे।
[अब सवाल ही सवाल]
जलभराव की जो स्थिति सामने आई उससे साफ हो गया कि शहर में ड्रेनेज सिस्टम अर्थात जल
निकासी व्यवस्था ठीक नहीं है, अन्यथा सड़कों पर पानी जमा न होता, लोगों के घरों में पानी न घुसता। ऐसे में सवाल काबिज होता है कि आज के हालातों से सबक लेकर भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने ठोस कार्ययोजना पर काम किया जाएगा या आग लगने पर ही कुआं खोदा जाएगा। क्या इस विषय पर गहराई से विचार मंथन होगा कि आखिर यह नौबत क्यों आई और इसका जिम्मेदार कौन है। सवाल यह है कि किस कारण शहर में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात निर्मित हुए। क्या शहर में जल निकासी के समुचित प्रबंध नहीं हैं। क्या नाली नालों की सफाई समय पर नहीं हुई। क्या नाली नालों की सफाई ढंग से न कर केवल औपचारिकता की गई। क्या अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण यह स्थिति बनी। क्या सरकारी और गैर सरकारी निर्माण कार्यों के दौरान तकनीकी मापदंड का ध्यान नहीं रखा गया। क्या यहां इंजीनियरिंग नक्शे और मास्टर प्लान की अनदेखी कर जल निकासी की परवाह किए बगैर सड़क, नाली,नालों, पुल,पुलियों और भवनों का निर्माण कराया गया। आखिर क्या असल वजह है कि जगह जगह जलभराव हुआ और इस समस्या से निजात दिलाने नगर निगम के अमले को बरसते पानी में जूझना पड़ा।जो काम तत्काल प्रभाव से किया गया क्या यह वर्षाकाल से पहले मुमकिन नहीं था।

