नई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सोमवार को मार्च निकाल रहे विपक्षी नेता भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद पुलिस को छकाते हुए तिलक मार्ग से सुप्रीम कोर्ट के गेट बी तक पहुंच गए। राहुल गांधी इंडिया ब्लॉक के सदस्यों के साथ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने भगवान दास मार्ग से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन उनका यह प्रयास सफल नहीं हुआ। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई।कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पुलिस ने इंडिया गेट सर्कल पर उन्हें रुकने की अनुमति नहीं दी।
इसके बाद काफ़िला दूसरे रास्ते पर आगे बढ़ा।कुछ देर तक सड़क पर बैठने के बाद प्रदर्शनकारी शाम छह बजे के क़रीब वापस लौटने लगे और इंडिया गेट की ओर मुड़ गए। इससे पहले रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में धक्का मुक्की भी हुई और पुलिस ने उन्हें पीछे धकेलने की कोशिश की।इस मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और आइसा की छात्र नेता नेहा बोरा समेत विपक्ष के कई नेता शामिल हैं। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की गई। लाइव लॉ और बार एंड बेंच के अनुसार, इसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। याचिका दाखिल करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समेत 11 लोग शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से पहले राहुल गांधी ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, हम वही सवाल उठा रहे हैं जो दो चुनाव आयुक्तों ने पूछा था। ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे रहे हैं? ज्ञानेश कुमार जी हम जानते हैं कि आपकी क्या हालत है, आपको नींद नहीं आती। हम आपको छोड़ेंगे नहीं, आप बचेंगे नहीं। हमें आपके अतीत और आपके भ्रष्टाचार के बारे में पता है, हम बस इंतज़ार कर रहे है। उन्होंने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनकारियों पर हो रही पुलिस कार्रवाई को लेकर कहा कि सरकार बहुत बड़ी ग़लती कर रही है। राहुल गांधी ने कहा,दिल्ली में कई दिनों से वोटों की चोरी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन चल रहा है, सवाल यह है कि दिल्ली को जेल में क्यों बदल दिया गया है? लोगों को शहर में आने से रोका जा रहा है, ट्रेनों और बसों में रोका जा रहा है। उन्होंने कहा, “सरकार बहुत बड़ी ग़लती कर रही है, क्योंकि हम देश को दिखाना चाहते हैं कि मोदी जी ज्ञानेश कुमार को बचा रहे है। उन्हें जितनी ज़्यादा सुरक्षा मिलेगी, हम आख़िरकार उनके कंट्रोलर तक उतनी ही आसानी से पहुंच पाएंगे। हमें ऐसी ख़बरें मिल रही हैं कि पुलिसकर्मी परेशान हैं क्योंकि उन्हें युवाओं की पिटाई करने का आदेश दिया जा रहा है, जबकि आरएसएस सदस्यों को खुली छूट देने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (सीजेआई) से मिलने का वक्त मांगा था। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था।
जंतर-मंतर अब नहीं रहा प्रोटेस्ट साइट, गृह मंत्रालय ने रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड समेत 3 जगहों को नामित किया
सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐतिहासिक जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से हटा दिया है। अब यहां धरना- प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को विरोध और प्रदर्शन के लिए नामित किया गया है। गृह मंत्रालय के एक आधिकारिक आदेश के अनुसार ऐसे प्रदर्शनों के लिए तीन नए स्थानों को नामित किया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्थायी आदेश जारी किया। इसमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को विरोध और प्रदर्शन के लिए नामित किया गया। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र होने के आह्वान के बाद राष्ट्रीय राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह कदम उठाया गया है। गृह मंत्रालय ने नागरिकों के लिए मौजूदा तय स्थान की जगह विरोध प्रदर्शन और डेमोंस्ट्रेशन ऑर्गनाइज करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए दूसरी जगहों की जांच करने के लिए एक कमेटी बनाई थी। नोटिस में कहा गया है कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर, जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया है।
कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, विचारशून्य नेतृत्व है: शिवराज सिंह चौहान
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि पार्टी का विचारशून्य एवं गैरजिम्मेदाराना नेतृत्व है तभी कांग्रेस अपनी चुनावी विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर दोष मढ़ रही है। भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कांग्रेस पर लगातार चुनावी हार से निराश होकर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस का लगातार चुनाव हारना और उसके बाद आंदोलन के जरिए अपनी नाराजगी सड़कों पर जाहिर करना उसकी राजनीतिक कार्यशैली बन गई है। उन्होंने असम, त्रिपुरा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के चुनावी परिणामों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए। भाजपा नेता ने कांग्रेस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी की हालत अब ऐसी हो गई है कि वह अपनी कमियों को स्वीकार करने के बजाय दूसरों को जिम्मेदार ठहराती है। उन्होंने कहा, ‘नाच न जाने, आंगन टेढ़ा।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस को अपनी हार के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए, न कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने चाहिए। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने दावा किया कि देश के कई राज्यों में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने गुजरात, नागालैंड, गोवा और दिल्ली में पार्टी की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस अब कई राज्यों में अपने सहयोगियों के मुकाबले कमजोर हो चुकी है। उन्होंने झारखंड से लेकर तमिलनाडु तक विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस को जूनियर पार्टनर के तौर पर काम करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने के लिए नेतृत्व और विचारधारा के स्तर पर आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री देश के लोगों के दिलों पर राज करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस झूठे आरोपों के जरिए सत्ता हासिल करना चाहती है और चुनावी जनादेश को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को विवाद में घसीटती है। चौहान ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सेना आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो कांग्रेस सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाती है।
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर देश को कमजोर करने वाली ताकतों के साथ खड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने जॉर्ज सोरोस और एलन मस्क का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह विदेशी ताकतों के प्रभाव से जुड़े आरोपों पर क्या रुख रखती है। चौहान ने राहुल गांधी के उस कथित बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह भाजपा नहीं ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ लड़ रहे हैं। भाजपा नेता ने राहुल गांधी से इस बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का मौजूदा राजनीतिक रुख देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उसके दृष्टिकोण पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कांग्रेस पर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा तथा आरोप लगाया कि पार्टी भगवान राम का विरोध करने वालों के साथ खड़ी होती है, जबकि राहुल अपने भाषण में भगवान शिव के बरात को अपनी बरात बताते है।
अपनी पत्रकार वार्ता के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस पिछले कई वर्षों से संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी हार के बाद अपनी रणनीति और नेतृत्व की समीक्षा करने के बजाय चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराती है।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में चुनावी सफलता जनता के विश्वास पर निर्भर करती है। उनके मुताबिक, पार्टी को अपनी विचारधारा, नेतृत्व और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।



