जबलपुर। मध्य प्रदेश के गवर्मेंट इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने ऐसा ड्रोन तैयार किया है, जिसका वजन महज 57 ग्राम है। यह ड्रोन इतना छोटा है कि हवा में थोड़ी ऊंचाई पर जाते ही गायब हो जाता है और इसे देखा नहीं जा सकता। इसे बनाने वाले छात्रों का कहना है कि इसका इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियां व सीक्रेट सर्विसेज के लिए भी किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस ड्रोन का कोई कंट्रोलर नहीं होता बल्कि इसे मोबाइल से चलाया जाता है।
ड्रोन का खिलौनों से हथियार तक का सफर
ड्रोन धीरे-धीरे हमारे जीवन में अपना स्थान बनाने लगे है। ईरान और अमेरिका के युद्ध में या रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की भूमिका सभी ने देखी है। ड्रोन का इस्तेमाल खिलौनों से लेकर सर्विलांस, खेती और यहां तक की हथियार के रूप में भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम बहुत से ड्रोन आयात किए जाते है। वहीं, अब जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने ये बेहद हल्का ड्रोन बनाया है, जो कई तरह से काम में लिया जा सकता है।
कंपटीशन में शामिल होने तैयार किया ड्रोन
हाल ही में जबलपुर के ट्रिपल आईटीडीएम कॉलेज में एक ड्रोन कंपटीशन रखा गया था। इस कंपटीशन में यह शर्त रखी गई थी कि इंजीनियरिंग छात्रों को बाजार से ड्रोन के कंपोनेंट्स नहीं खरीदना है बल्कि खुद से डिजाइन करना है और इसका वजन कम से कम होना चाहिए। इसके साथ ही टारगेट दिया गया था, जिसमें एक लूप बनाया गया था। इस लूप में से ड्रोन को गुजरा था और वापस अपनी पोजीशन पर आकर बैठना था और यह काम उसे लगातार करना था। जबलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल डिपार्टमेंट के छात्रों ने एक टीम बनाकर इसी टास्क को पूरा किया।
बिना बैटरी 30 ग्राम, बैटरी के साथ 57 ग्राम का ड्रोन
इस टीम के सदस्य अदनान पाटनवाला ने बताया, ” हमारे लिए यह टास्क बहुत कठिन था। लेकिन सबसे पहले हमने इसकी डिजाइनिंग की और हमने कई छोटी-छोटी चिप और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के आधार पर एक बोर्ड तैयार किया। इसके बाद इसकी छोटे-छोटे लेग बनाए। जब हमने इसे बनकर तैयार किया तब इसका कुल वजन मात्र 30 ग्राम था। फिर इसमें एक बैटरी लगाई। बैटरी के साथ इसका वजन मात्र 57 ग्राम आया।”अदनान कहते हैं, ” इस ड्रोन को हथेली पर रखा जा सकता है। जब हमने इसे कंपटीशन में उतारा तो हमें इस कंपटीशन में सेकंड प्राइज मिला। हम अभी भी इस ड्रोन पर काम कर रहे है। हमारी कोशिश है कि यह और छोटा हो और जैसे ही यह ऊंचाई पर जाए, तो यह दिखना बिल्कुल बंद हो जाए।”
5 किलोमीटर है ड्रोन की रेंज
इसी टीम के सदस्य मनीष इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिक्लस के 4th सेमेस्टर में है। मनीश ने बताया, ” यह ड्रोन कई काम आ सकता है। इसे बच्चों के खिलौने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। लाइटिंग के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है यदि इसमें एक छोटा सा कैमरा लगा दिया जाए तो इससे शूट भी किया जा सकता है और इसका सबसे बड़ा उपयोग सर्विलांस के लिए किया जा सकता है क्योंकि इतना छोटा है की ऊंचाई पर यह दिखता नहीं है। ऐसी स्थिति में गुप्त सूचनाओं इकट्ठे करने वाली संस्थाएं इसे ऐसी जगह पर भेज सकते हैं, जहां छुपकर काम किया जाता है। इसे लगभग 5 किलोमीटर दूर तक उड़ाया जा सकता है।”
हालांकि, इंजीनियरिंग के छात्रों का कहना है कि अभी इसे बनाने में उनका खर्चा कुछ ज्यादा हुआ है। क्योंकि उन्हें एक-एक समान अलग से खरीदना पड़ा और बहुत सा सामान उन्हें स्थानीय बाजार में नहीं मिला। लेकिन यदि इस उत्पाद का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाए तो यह काफी सस्ता बन सकता है।
कई इन्वेस्टर दिखाएंगे इंटरेस्ट
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव चांडक ने बताया, ” यह ड्रोन हमारे लिए एक बड़ी सफलता है। अभी हमारे छात्रों ने जो काम किया है उसकी जानकारी हम इंक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से इन्वेस्टर तक पहुंचाएंगे। यदि कोई इन्वेस्टर हमारे इस प्रोटोटाइप के आधार पर इसका उत्पादन करना चाहता है, तो पूरी तकनीकी मदद इन्हीं बच्चों के माध्यम से उस उत्पादक को प्रदान की जाएगी। इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर स्मार्ट सिटी के स्टार्ट अप कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। हालांकि, अभी यह बच्चे पढ़ रहे है। यदि वे खुद इसे स्टार्टअप की तरह शुरू करना चाहेंगे, तो इसके लिए भी मदद की जाएगी।”वहीं, डॉक्टर राजीव चांडक ने बताया, कॉलेज में हम लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे नए से नए उत्पाद तैयार करे। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई में रुचि बढ़ती है बल्कि इसके जरिए रोजगार की संभावनाएं भी बनती है।


