जबलपुर। भोपाल एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान अमचूर व गरम मसाला को हेरोइन व ड्रग्स बताते हुए एक युवक के खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया। सैंपल के जांच रिपोर्ट में कोई भी प्रतिबंधित पदार्थ नहीं पाया गया। इस दौरान 57 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रखे जाने के खिलाफ इंजीनियर युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक खोत ने निर्दोष होने के बावजूद भी न्यायिक अभिरक्षा में रखे जाने पर नाराजगी व्यक्ति की। एकलपीठ ने इसे याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपये दिये जाने के आदेश जारी किये है। युवक को डेढ दशक तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद न्याय प्राप्त हुआ।
मचूर पाउडर और ब्रांडेड गरम मसाला को हेरोइन और एमडीईए ड्रग्स बताया
ग्वालियर निवासी याचिकाकर्ता इंजीनियर अजय सिंह की तरफ से साल 2011 में दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वह भोपाल से दिल्ली के लिए जेट एयरवेज की फ़्लाइट से रवाना हो रहा था। भोपाल हवाई अड्डे पर नियमित सुरक्षा जांच के दौरान ईटीडी मशीन से सामान और अन्य चीजों (जिनमें ब्रांडेड अमचूर पाउडर और ब्रांडेड गरम मसाला पाउडर के पैकेट थे) की स्कैनिंग की जा रही थी। जांच में पाया गया कि अमचूर पाउडर व गरम मसाले के पैकेटों में हेरोइन और एमडीईए ड्रग्स मिला हुआ था। उसके खिलाफ भोपाल के गांधी नगर थाने में नारकोटिक्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफतार कर लिया गया। जब्त किए गए पाउडर के पैकेट 10 मई 2010 को क्षेत्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गये।
प्रदेश की क्षेत्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला ने जांच के लिए आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण दस दिनों के बाद नमूने को वापस लौटा दिया। इसके बाद जब्त किये गये सैंपल को जांच के लिए सैंपल सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी, हैदराबाद भेजा गया था। सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी से 30 जून 2010 को प्राप्त रिपोर्ट में बताया गया कि सैंपल में किसी प्रकार का कोई प्रतिबंधित पदार्थ नहीं पाया गया। जिसके बाद पुलिस के द्वारा विशेष न्यायालय में खात्मा रिपोर्ट पेश करने पर 2 जुलाई 2010 को निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया।
57 दिनों तक न्यायिक हिरासत में सजा भुगतनी पड़ी
इस दौरान उसे 57 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने की सजा भुगतनी पड़ी। न्यायालय में पुलिस द्वारा पेश की गई एक्सपंज रिपोर्ट में बताया गया है कि ईटीडी मशीन तकनीकी रूप से खराब थी। ऐसे में अनुभवहीन और अयोग्य कर्मचारियों द्वारा उसे जेल में रखा गया। न्यायालय ने उसे 2 दिसम्बर को दोषमुक्त कर दिया।
10 करोड़ के मुआवजे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की याचिका लगाई
याचिका में दस करोड़ के मुआवजा तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की राहत चाही गयी थी। इसके अलावा प्रतिबंधित और विस्फोटक पदार्थों का पता लगाने के उद्देश्य से उचित मशीनें स्थापित तथा आवश्यक उपकरणों से लैस प्रशिक्षित अधिकारियों को तैनात करने की राहत चाही गयी थी। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा मशीन सप्लाई करने वाली उक्त कंपनी को ब्लैक लिस्ट किये जाने की मांग भी की गयी थी।
अदालत ने 10 लाख के मुआवजे के साथ प्रयोगशालाओं को लेकर की सख्त टिप्पणी
एकलपीठ ने अपने आदेश में राज्य की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं के पास जांच के जरूरी उपकरण ही नहीं हैं तो इतनी बड़ी आधारभूत संरचना और विशेषज्ञ अधिकारियों की तैनाती का औचित्य क्या है। संसाधनों की कमी के कारण एक निर्दाेष व्यक्ति को 57 दिन जेल में रहना पड़ा। जो उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। एकलपीठ ने मुख्य सचिव को आदेशित किया है कि एक महीने के भीतर प्रदेश की सभी रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी का निरीक्षण कर जरूरी उपकरण और स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ता को मुआवजा के रूप में 10 लाख रुपये दिये जाएं।