■ मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में सरकारी जमीन से जंगल काटकर अवैध उत्खनन किए जाने का मामला
■ कलेक्टर के बाद अब संभाग आयुक्त से हुई शिकायत
सतना। एक तरफ जल जमीन जंगल को बचाने की बात होती है और दूसरी तरफ धरातल पर हकीकत यह है कि इनके संरक्षण के लिए गोहार लगाने के बाद भी प्रशासन कार्रवाई के लिए आगे नहीं आता। इस बात को प्रमाणित करता हुआ एक मामला मैहर जिले से सामने आया है, जहां एक
जनप्रतिनिधि जंगल की कटाई रोकने और बालू का अवैध तरीक़े से उत्खनन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई किए जाने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ रहा है लेकिन उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने तो दूर, शिकायत की सत्यता मौके पर जाकर जांचने के लिए कोई आगे नहीं आया है।
मैहर जिले की रामनगर जनपद पंचायत के सदस्य राजेंद्र सिंह मुन्ना ने फोटो और वीडियो प्रमाण के साथ पुलिस थाना से लेकर कलेक्टर तक शिकायत कर बताया कि ग्राम कुबरी रझउआ में नदी किनारे 246 एकड़ शासकीय भूमि से जंगल काटकर बालू का अवैध तरीके उत्खनन किया जा रहा है। मगर शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। दो मर्तबा कलेक्टर से शिकायत के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तब उन्होंने विगत 26 मई को संभागायुक्त रीवा से कार्रवाई के लिए गोहार लगाई है।
[दिन रात मशीनें कर रहीं काम]
जन सुनवाई में संभाग आयुक्त से शिकायत करते हुए जनपद सदस्य राजेंद्र सिंह ने बताया कि जंगल को काटकर बालू का अवैध उत्खनन करने के लिए ट्रेक्टर, डंपर और जेसीबी मशीनों को लगाया गया है। तकरीबन दो दर्जन जेसीबी मशीन जंगल उजाड़ने और उत्खनन के काम पर लगी हैं, हर दिन तकरीबन डेढ सैकड़ा डंपर से बालू का परिवहन किया जा रहा है। दिन रात यहां काम चल रहा है, प्रशासन जब चाहे तब कार्रवाई कर सकता है।
[ऐसे कैसे होगा वन संरक्षण]
जनपद सदस्य राजेंद्र सिंह मुन्ना बताते हैं कि जहां यह अवैध कारोबार चल रहा है वहां खदान धसने से एक ट्रेक्टर ड्राइवर की मौत हो चुकी है। उसी इलाके में रामनगर तहसीलदार को ट्रेक्टर से कुचलने की कोशिश हुई थी, एक पटवारी को ट्रेक्टर से कुचल कर मार दिया गया था। राजेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने इस अवैध कार्य में लिप्त व्यक्तियों और वाहनों की सूची अधिकारियों को दी है, बावजूद इसके किसी पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।सवाल यह है कि जब एक जनप्रतिनिधि की शिकायत को प्रशासन गंभीरता से नहीं लेगा, तो कैसे वन संरक्षण होगा और पर्यावरण कैसे सुरक्षित रहेगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण “एनजीटी” पर्यावरण संबंधी कानूनों को सख्ती से लागू करता है। एनजीटी अधिनियम 2010 के तहत गठित यह ट्रिब्यूनल पर्यावरण से जुड़े मामलों का त्वरित और प्रभावी निपटारा सुनिश्चित करता है।
इसके निर्देश हैं कि बिना पर्यावरण मंजूरी के खनन पर प्रतिबंध लगे और अवैध खननकर्ताओं से भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली हो। वनों की कटाई, जंगलों के पुनरुद्धार और वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को अतिक्रमण से बचाया जाए। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों और संस्थाओं पर भारी जुर्माना लगाया जाए और नुकसान की भरपाई कराई जाए।

